PT Sir Review : सामाजिक संदेश के साथ दमदार मूवी
भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में सिर्फ कहानियाँ नहीं होतीं… वो एक अनुभव होती हैं! PT Sir भी ऐसी ही एक फिल्म है जो ना केवल दिल को छूती है, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देती है। PT Sir movie सामाजिक संदेश PT Sirमूवी दमदार मूवी क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण पीटी मास्टर भी हीरो हो सकता है? जी हाँ! यही दिखाती है ये फिल्म—एक आम इंसान की असाधारण लड़ाई!
PT Sir Review : PT Sir movie सामाजिक संदेश PT Sirमूवी दमदार मूवी 2024 में रिलीज़ हुई तमिल फिल्म PT Sir, एक स्पोर्ट्स ड्रामा के रूप में शुरू होती है लेकिन जल्द ही यह सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकार और नैतिकता जैसे गहरे मुद्दों की ओर रुख करती है। इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं निर्देशक Karthik Venugopalan, और मुख्य भूमिका में हैं Hiphop Tamizha Aadhi। फिल्म तमिल भाषा में बनी है लेकिन इसकी कहानी और भावनाएं हर भाषा और संस्कृति के दर्शकों को प्रभावित करती हैं। आइए इस फिल्म की पूरी समीक्षा करते हैं।
मूल जानकारी
- फिल्म का नाम: पीटी सर (PT Sir)
- निर्देशक: के. अर्णव
- मुख्य कलाकार: हिप हॉप तमिझा आदि, कश्यप बरदराजन, अनिका सुरेंद्रन
- शैली: ड्रामा / सोशल थ्रिलर
- रिलीज की तारीख: 24 मई 2024
- भाषा: तमिल (हिंदी डब वर्जन उपलब्ध)
कहानी
PT Sir की कहानी एक साधारण लेकिन ईमानदार और सिद्धांतवादी शारीरिक शिक्षा अध्यापक की है, जिसका नाम अर्जुन (अदाकारी में हिप हॉप तमिझा आदि) है। वह एक सरकारी स्कूल में काम करता है और बच्चों को न केवल शारीरिक शिक्षा देता है बल्कि उनके जीवन के मूल्य भी सिखाता है।
अर्जुन की ज़िंदगी तब बदल जाती है जब वह एक छात्रा के साथ होने वाले शोषण को देखता है और उसके खिलाफ आवाज़ उठाने की ठान लेता है। यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोल देता है। फिल्म यहीं से सामाजिक संदेश में तब्दील हो जाती है और दर्शकों को एक साहसी अध्यापक की लड़ाई में शामिल कर लेती है।
निर्देशन व पटकथा
के. अर्णव ने इस फिल्म को जितनी संजीदगी से बनाया है… उतना ही साहसिक विषय चुना है! शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार, बच्चों के साथ होने वाला अन्याय, और समाज की चुप्पी—इन सबको इतनी सच्चाई से दिखाना आसान नहीं था… मगर निर्देशक ने कर दिखाया!!
पहला हाफ थोड़ा धीमा लगता है—लेकिन रुको! जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है… आपकी धड़कनें तेज हो जाएँगी!! कोर्टरूम ड्रामा, भावनात्मक संघर्ष और अर्जुन की नज़रों में उठती आग… सब कुछ दर्शकों को सीट से बाँधे रखता है।

अभिनय
क्या कहें… हिप हॉप तमिझा आदि ने जान डाल दी है! अर्जुन का किरदार इतना असली लगता है कि आप भूल जाते हैं कि आप फिल्म देख रहे हैं—ऐसा लगता है जैसे कोई आपके सामने ही खड़ा है!
उनके डायलॉग्स में गुस्सा, दर्द, और उम्मीद सबकुछ झलकता है—“अगर हम शिक्षक ही चुप रहेंगे, तो कौन बोलेगा?”—इस डायलॉग ने पूरे थिएटर को सन्न कर दिया!
अनिका सुरेंद्रन ने भी भावनात्मक दृश्यों में कमाल कर दिखाया है… आँखे नम कर देने वाला अभिनय! कश्यप बरदराजन बतौर विलेन मजबूत छाप छोड़ते हैं—आपको उनसे नफ़रत सी होने लगेगी!!
तकनीकी पक्ष
- सिनेमैटोग्राफी? शानदार! स्कूल की गलियों से लेकर कोर्टरूम के हर फ्रेम तक… हर दृश्य बोलता है!
- संगीत? दिल छू लेने वाला! बैकग्राउंड स्कोर आपके रोंगटे खड़े कर देगा!!
- एडिटिंग? टाइट, क्रिस्प! एक भी दृश्य फालतू नहीं लगता—बस एक के बाद एक झटका देता है।
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सामजिक संदेश
अब बात करते हैं सबसे जरूरी पहलू की—फिल्म का संदेश!
क्या हम अपने बच्चों को वाकई एक सुरक्षित स्कूल दे पा रहे हैं…? क्या शिक्षक सिर्फ सिलेबस पढ़ाने तक सीमित हैं…?
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सुझाव :
PT Sir इन सवालों को सीधे दिल में उतार देती है। ये फिल्म सिर्फ कहानी नहीं है—ये एक पुकार है! एक अलार्म है!! और अर्जुन उस अलार्म की आवाज़ है, जो कहता है— अब बहुत हुआ!!
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